एक अधूरी मोहब्बत की कहानी , क्या हुआ उस आखिरी रात के बाद |

• अरविंद पार्क की उसी पुरानी बेंच पर बैठा था जहां वहां हर शाम को प्रिया से मिला करता था आज भी उसके हाथों में वही पुरानी डायरी थी जिसमें उसने उनके हर छोटे-बड़े पलों को सहेजा था हर पन्ना उन यादों से भरा था जो कभी उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशियां थी प्रिया और अरविंद के बीच इतना गहरा प्यार था कि दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए तरस जाया करते थे अरविंद एक छोटे से गांव का लड़का था प्रिया अरविंद के गांव अपने मामा के घर रहने आई थी दोनों के घर आमने-सामने थे इसलिए दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला,

2 साल पहले की बात है कॉलेज का पहला दिन था जब अरविंद ने पहली बार प्रिया को देखा, सफेद सलवार कुर्ते में बालों में हल्की सी हवा से खेलती लटे और चेहरे पर मासूम सी मुस्कान – उस पल अरविंद को लगा कि दुनिया थम सी गई है धीरे-धीरे उनकी दोस्ती हुई बातें बड़ी और देखते ही देखते दोस्ती मोहब्बत में बदल गई, दोनों पास के ही कॉलेज में थे प्रिया हमेशा से सपनों से भरी लड़की थी उसे दुनिया घूमने नई चीज़ सीखने और खुद को पहचानने का शौक था , अरविंद उसके हर सपने में उसका साथ देना चाहता था दोनों साथ में भविष्य के सपने देखते शादी की बातें करते और छोटी-छोटी खुशियों को जीते जब वह गांव के खेतों पर मिलते एक दूसरे की तरफ से आकर नहीं हटती दोनों को एक दूसरे की आंखों में प्यार दिखाने लगा दोनों का प्यार बहुत तेज हो गया अरविंद 22 साल का था वही प्रिया 21 साल की थी प्यार करने की उम्र हो चुकी थी दोनों की दोस्ती के कारण वह हमेशा कॉलेज एक ही बाइक से जाने लगे लेकिन घर वालों को नहीं पता कि यह दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करने लगे,

पर जिंदगी हमेशा वैसी नहीं रहती जैसी हम सोचते हैं प्रिया को विदेश में पढ़ाई करने का मौका मिला यह उसके करियर का सबसे बड़ा मौका था अरविंद जानता था कि यहां उसका सपना है और उसने खुद अपनी मोहब्बत को पीछे रखकर उसे प्रोत्साहित किया जाते समय प्रिया ने कहा था अगर हमारी मोहब्बत सच्ची है तो दूरी कभी हमें अलग नहीं कर सकती, क्योंकि प्यार अगर सच्चा है तो दूर होकर भी निभाया जा सकता है लेकिन अरविंद प्रिया को कभी खोना नहीं चाहता था दोनों एक दूसरे को इतना पसंद करते थे कि एक दूसरे के बिना मन नहीं लगता लेकिन दोनों ने खुद को काबू में किया और निकल पड़े अपने सपनों की तरफ जाने से एक दिन पहले प्रिया ने अरविंद को मिलने के लिए बुलाया जहां दोनों एक दूसरे को गले लगा कर रो पड़े और बोले कभी ना कभी वापस मिलेंगे दोनों की आंखों में खूब प्यार के आंसू थे लेकिन कुछ कर नहीं सकते , प्रिया दूसरे दिन चली गई और अरविंद हर दिन उसकी यादों में जीने लगा,

कुछ दिन तक दोनों ने फोन पर बात की पहले फोन कॉल्स फिर मैसेज और धीरे-धीरे बातचीत कम होने लगी एक दिन प्रिया का मैसेज आया उसने नए माहौल नए लोगों और अपने सपनों में खोकर अपने दिल की दिशा बदल दी थी उसने अरविंद से कहा कि शायद उनका रिश्ता अब आगे नहीं बढ़ सकता शायद प्रिया ने बड़े शहर में जाकर किसी और से प्यार कर लिया या फिर अरविंद से मजाक में बोल रही है लेकिन अरविंद ने कुछ नहीं कहा उसने बस इतना लिखा कि तुम्हारी खुशी ही मेरी खुशी है तुम जो बोलोगी मैं मान लूंगा लेकिन तुम्हारे लिए मेरा प्यार हमेशा जिंदा रहेगा दोनों ने बहुत देर बात की दोनों फोन पर बात करते-करते रोने लगे और अपने प्यार के बारे में बात करते रहे लेकिन अरविंद को पता नहीं था कि यह मेरा आखरी फोन कॉल है प्रिया अरविंद को छोड़ देगी बहुत दिन बीत गए लेकिन प्रिया का कोई फोन मैसेज कॉल नहीं आया आज भी वहां इस बेंच पर बैठकर प्रिया की यादों में खोया रहता है वह जानता है कि मोहब्बत हमेशा साथ होने का नहीं बल्कि किसी की खुशी में अपनी खुशी ढूंढने का नाम है मोहब्बत हर किसी से नहीं होती लेकिन जिस होती है लाजवाब होती है अरविंद ने अपनी प्यार की डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा है प्यार हमेशा पूरा होना जरूरी नहीं बस सच्चा होना चाहिए अगर वह खुश है तो यही मेरे प्यार की जीत है

और वहां हल्की मुस्कान के साथ सूरज को धरते हुए देखा है क्योंकि हर ढलते सूरज के बाद एक नई सुबह आती है इसी तरह काफी दिन निकल गए अरविंद ने प्रिया को याद करना बहुत कम कर दिया था क्योंकि अरविंद सोचा प्रिया सच में किसी के प्यार में उलझ गई लेकिन उसको पता नहीं था कि प्रिया ने एक मजाक किया वह भी अपनी पढ़ाई अच्छे से करने के लिए ताकि रोज कॉल करने याद ना आए जब प्रिया वापस गांव में आई तब तक अरविंद के साथ बहुत कुछ हो गया था जिसकी वजह से प्रिया को बहुत दुख हुआ और वहां रोपदी उसको अपनी गलती का पछतावा उसे दिन हुआ कि मैं मुझे मजाक में नहीं बोलना चाहिए था ऐसा क्या हुआ इस कहानी में अगर इस कहानी को आगे बढ़ाना है तो कमेंट में बताएं मैं इसका दूसरा पाठ लेकर आऊंगा जिसमें पूरी कहानी को अच्छे से पड़ेंगे या कहानी एक काल्पनिक कहानी बनाइए या कहानी किसी रियल घटना पर आधारित नहीं है हालांकि आप इसको पढ़कर फीलिंग ले सकते हो,

यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और किसी वास्तविक घटना, व्यक्ति या स्थान से इसका कोई संबंध नहीं है। इसे केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है, अतः इसे तथ्यात्मक या वास्तविक घटना के रूप में न लें।

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