•25 जुलाई 2025 को राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया जिसने पूरे देश को झंझोर दिया मनोहर थाना ब्लॉक के पीपलोदी गांव में स्थित एक प्राथमिक सरकारी स्कूल का भवन अचानक प्रार्थना के समय गिर गया जिसमें कई मासूम बच्चे मलबे के नीचे दब गए इस हादसे में अब तक 6 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 29 घायल हुए हैं कई की हालत बहुत ही गंभीर बताई जा रही है
यह हादसा कहां पर हुआ और किस समय हुआ – यह दुर्घटना शुक्रवार सुबह लगभग 8:30 बजे उस समय घटी जब बच्चे रोज की तरह स्कूल की प्रार्थना सभा में शामिल हो रहे थे तभी स्कूल का पुराना और जर्जर भवन अचानक गिर पड़ा मलबे के नीचे कई बच्चे दब गए स्थान ने ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी और बचाव अभियान शुरू किया गया
•मृतको और घायलों की स्थिति क्या है – अब तक 6 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है 29 अन्य घायल है जिसमें से 10 को गंभीर अवस्था में झालावाड़ जिला अस्पताल और कोटा रैफर किया गया अस्पताल के सूत्रों के अनुसार दो से तीन बच्चों की हालत नाजुक है बच्चों की उम्र 6 से 12 वर्ष के बीच बताई जा रही है
• क्या बचाओ अभियान में देरी हुई ? – घटना के बाद स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए आगे आए उन्होंने जेसीबी मशीन और हाथों से मलवा हटाना शुरू किया प्रशासन की ओर से राहत कार्य लगभग 30 मिनट की देरी से शुरू हुआ जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी |
• हादसे का कारण: जर्जर भवन की अनदेखी – स्कूल का यह भवन बहुत पुराना और जर्जर था ग्रामीणों ने पहले भी स्कूल भवन की हालत पर कई बार शिकायत की थी लेकिन शिक्षा विभाग या पंचायत की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया कई बार बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ना पड़ता था बारिश के चलते इमारत की दीवारें वह छत और भी कमजोर हो चुकी थी और उसी का परिणाम यह भयंकर रास्ता बन गया |
• मुख्यमंत्री की परिक्रिया और जांच का आदेश – राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस हादसे पर घेरा शोक जताया और मृत्यु को के परिजन को 5 लख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का अनुशासन दिया
• प्रशासन की लापरवाही पर सवाल – इस हादसे ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की इमारत की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है हजारों सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां भावनो की हालत खस्ताहाल है लेकिन रखरखाव और निरीक्षण के नाम पर सिर्फ कागजी कार्यवाही की जाती है यदि समय रहते मरम्मत की जाति या बच्चों को अन्य स्थान पर पढ़ने भेजा जाता तो शायद इन मासूम बच्चों की जान बच जाती

